जो कोई हरिद्वार आता है
जो कोई हरिद्वार आता है
वो मन की पा ही जाता है
हमारे आश्रम में आके वो गुरु किरपा पा ही जाता है
ये पावन धरा है कनखल की
जहां पर दक्ष विराजे है
जहां पर सती कुंड में सत्य का डंका बाजे है।।
(इसी कनखल में परम् पूज्य गुरुदेव परमहंस स्वामी श्री विष्णु देवानन्द गिरिजी महाराज ने ज्ञान की गंगा बहाई थी)
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ये पावन धरा है कनखल की
जहां पर दक्ष विराजे है
जहां पर सती कुंड में सत्य का डंका बाजे है।।
इसी कनखल में गुरुजी ने
ज्ञान की ज्योत जलाई थी
उसी ज्योति से प्रकाशित
पूज्य गुरुदेव विराजे है
( उनके राम और कृष्ण सदृश्य शिष्य परम् आदरणीय ,परम् श्रधेय, अर्चनीय वंदनीय महत स्वामी श्री रामानन्द गिरी जी और स्वामी कृष्ण नंद गिरी जी)
इसी कनखल में गुरुजी ने
ज्ञान की ज्योत जलाई थी
उसी ज्योति से प्रकाशित
पूज्य गुरुदेव विराजे है
हमारे गुरूद्वय ने ऐसी तप की अलख जगाई है
जो दूर दूर से इतने पूज्य सन्तो को ले आई है
--हम भी दर्शन के इनके भक्ति में खो गए है
इनकी उपस्थिति से ही धन्य हो गए है
ये शिव भोले की कृपा है
और मां गंगा का प्यार दुलार
जो गुरुदर्शन को ले आया
न के किलोमीटर का विचार
अंत मे
प्रार्थना है यही गुरुवर से
रहे सदा आपका साथ
आते रहे भक्ति भाव से
सदा आपके द्वार
और
राम और कृष्ण सरीखे गुरुदेव का
सदैव रहे हमारे सिर पर हाथ
राम और कृष्ण सरीखे गुरुदेव का
सदैव रहे हमारे सिर पर हाथ ।
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