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तेरी चाहत के कांटे

तेरी चाहत  कांटों से भरी  बेलोस  बदगुमा डालियों पर  खिला  एक खूबसूरत गुलाब !  अभी  मैंने  तुझे  सिर्फ  नजरों से छुए भरा था  कि सारे कांटे एक साथ उठे  और मेरे कलेजे को बींध गए ।। 1989-90

तेरा ख्याल -कविता

 नीरव निर्जन निःशब्द  नीरव निर्जन निःशब्द मौन का साम्राज्य है  कहीं कोई नहीं है---  सब तरफ चुपचाप है -सुनसान है । मैंने अपने दिल की लाल मखमली डिबिया खोली चुपके से उसमें से  तेरे ख्याल का कीमती रत्न निकाला  उसे देखा ,छुए और सराहा  और फिर  चारों तरफ देखा कि  कहीं कोई देखता  तो नहीं है ?  जब आश्वस्त हो  गई  तो ढीठ बनकर  एक बार उस ख्याल को  कस कर कलेजे से लगा लिया!  फिर वापस  उसे डिबिया में रख  चली आई वहीं लौट कर  तेज तेज कदमों से चलकर  जहां शोर है ,भीड़ है  कहते जिसे दुनिया है । चौबीसों  घंटे की बिकी   इस जिंदगी में  ऐसा एक लम्हा भी रोज मिले तो  क्या कम है ? रचना काल 1989-90 

# Empowering Woman#नारी शक्ति

 #kaplna chawla जैसी बहादुर नारियां हमारे देश का सौभाग्य है महिला दिवस पर विशेष  नारी हूँ, हर युग में वक्त के साथ चलना जानती हूँ ।  सीता, अहिल्या, गार्गी, द्रौपदी सदृश  इतिहास को संजोना जानती हूँ।  अपने स्वाभिमान के परचम को,  त्याग के धागे में पिरोना जानती हूँ।  नारी तुम केवल श्रध्दा नहीं वरन शक्तिशाली हो  दुर्गा हो तुम लक्ष्मी हो तुम सरस्वती हो और सीता हो तुम सत्य का मार्ग दिखलाने वाली तुम रामायण हो गीता हो तुम \ अब केवल शिक्षिका  ही नही हर क्षेत्र में छाई हो तुम  अर्थ जगत हो विज्ञानं या हो पोस्ट ऑफिस की नौकरी  फिर चाहे काउंटर कार्य ,  डाक वितरण या हो DO  हर ऑफिस में  तुम भी हो पुरुषो के समान हर पद की सच्ची अधिकारी l   घर से ऑफिस तक नारी अपना मकाम बनाती है  और घर आकर भी अपनी भूमिका की अच्छे से निभाती है  जो माँ बनकर ममता की बौछार लगाती है  -पत्नी बनकर सुख – दुःख में साथ निभाती है बहन बनकर कितना स्नेह लुटाती है –  जो अपने बच्चो के लिए काल से भी भीड़ जाती है अंत में यही कहूँगा  सब मात्...

#मुंह के छालों के सीक्रेट और गुप्त आयुर्वेद के नुस्खे ,दादी नानी के आजमाए 100 साल पुराने नुस्खे

 आज मैं आपसे हमारी प्राचीन  विरासत औऱ परम्परागत देसी आयुर्वेदिक करिश्माई नुस्खों के बारेमे बात करने जा रहा हूं , 1. #दादी नानी के प्राचीन नुस्खे आज भी अपनी प्राकृतिक और सुरक्षित गुणधर्मों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये नुस्खे आमतौर पर घरेलू उपचार के रूप में जाने जाते हैं और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। 2. विशेष रूप से जड़ी-बूटियों, औषधीय पौधों, और घरेलू सामग्रियों से बने ये नुस्खे दीर्घायु, सम्बन्ध और परंपरा का प्रतीक हैं। उन्हें अपनाने से शारीरिक और मानसिक रूप से सुधार हो सकता है। 3. कई बार ये नुस्खे सरकारी और आधिकारिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं द्वारा भी समर्थित होते हैं, जिससे उनकी प्रभावशीलता और प्राकृतिकता पर विश्वास बढ़ता है। 4. इन नुस्खों में सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्य भी होता है, क्योंकि वे परंपरागत ज्ञान और अनुभव का प्रतीक हैं जो समाज को संबलित और समृद्ध बनाता है। 5. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये नुस्खे साधारण और सस्ते होते हैं, और घरेलू उपचार के रूप में स्वास्थ्य की देखभाल में मदद कर सकते हैं बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। तो चलिए पहला नुस्खा है...

सांकरी उत्तरकाशी ,अविस्मरणीय यात्रा मार्च 2024

 # सांकरी उत्तरकाशी से #Kalki  कलाप गांव व एक सपना 29 .03.25 टन्स घाटी को  #महाभारत की जन्मभूमि कहा जाता है और उत्तराखंड का कलाप गांव भी इसी घाटी में है। यही कारण है कि यहां के लोग खुद को कौरवों और पांडवों का वंशज बताते हैं। माना जाता है कि कलाप के लोग महाभारत के पांडवों और कौरव भाइयों के वंशज हैं। वास्तव में, कलाप में मुख्य मंदिर पांडव भाइयों में से एक कर्ण को समर्पित है। गांव के स्थानीय लोगों से बात करेंगे तो आपको महाभारत से जुड़े आकर्षक किस्से और सुनने को मिलेंगे। इस गांव में कर्ण का मंदिर है। इसीलिए यहां कर्ण महाराज उत्सव भी मनाया जाता है। ये विशेष उत्सव यहां 10 साल के अंतराल पर मनाया जाता है। केवल इतना ही नहीं, जनवरी के महीने में यहां पांडव नृत्य भी किया जाता है, जिसमें महाभारत की कई कथाओं का प्रदर्शन किया जाता है। ये जगह काफी दुर्गम माना जाता है। यही वजह है कि यहां जो कुछ भी लोग खाते-पीते या पहनते हैं, वो सब कुछ कलाप में ही बनता है इसी वजह से यहां के लोग अभी तक खुद को पांडवों और कौरवों का वंशज बताते हैं. देहरादून से ये महज 210 किलोमीटर की ही दूरी पर है..सांकरी ...