तेरा ख्याल -कविता

 नीरव निर्जन निःशब्द 

नीरव निर्जन निःशब्द

मौन का साम्राज्य है 

कहीं कोई नहीं है---

 सब तरफ चुपचाप है -सुनसान है ।

मैंने अपने दिल की लाल मखमली डिबिया खोली

चुपके से उसमें से 

तेरे ख्याल का कीमती रत्न निकाला

 उसे देखा ,छुए और सराहा 

और फिर

 चारों तरफ देखा कि

 कहीं कोई देखता  तो नहीं है ?

 जब आश्वस्त हो  गई 

तो ढीठ बनकर 

एक बार उस ख्याल को 

कस कर कलेजे से लगा लिया!

 फिर वापस 

उसे डिबिया में रख

 चली आई वहीं लौट कर

 तेज तेज कदमों से चलकर 

जहां शोर है ,भीड़ है

 कहते जिसे दुनिया है ।

चौबीसों  घंटे की बिकी 

 इस जिंदगी में

 ऐसा एक लम्हा भी रोज मिले तो 

क्या कम है ?

रचना काल 1989-90 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Gz meetup पर 2024

जो कोई हरिद्वार आता है

राष्ट्रीय कबि चौपाल।बीकानेर