14 अगस्त 24 ,माता यात्रा विवरण
यात्रा --6 अगस्त से 15 अगस्त 24 त
कल रात गंगानगर से निकले ,इस बार सुरेश धींगड़ा जी की बस केंसिल ,सवारी नही मिली उन्हें पर्याप्त,पर मेरा भी मन था औऱ बिरसा राम जी का भी ,फिर राजीव भाई भी तैयार था ,औऱ उसने कहा के चलेगे जरूर।
फिर अश्वनी बंसल ने बताया के उनकी एक जानकर महिला है सुरेखा ,ssb रोड से ,माता रानी का नाम ले उनके साथ बुक करा दी सीट।
और अभी तक बढिया रहा ,सीट हालांकि वो कह रही थी के आगे देंगी पर आश्चर्य10 बजे खिंची चौक पर जब बस RJ19 PA 4197 ,आई और सुरेखा ने हमे हमारी फेवरेट बिल्कुल आगे वाली ड्राइवर के पीछे3 वाली ही अलॉट कर दी ।जय माता दी ।
अभी नँगल में लक्ष्मी नारायण मंदिर धर्मशाला में ठहरे है ,कल नैना देवी जाना है।
मुकेश मैनेजर ने इतनी मिन्नते करवाई और आखिरकार ac कमरा दे दिया ।
अभी उसी में है ।
सुबह 6 बजे पटियाला में काली माता मंदिर दर्शन करके ,मनसा देवी मंदिर ,पंचकूला ,चंडीगढ में दर्शन किये ।
आनंद आया भीड़ नही मिली अभी तक ।
बस में भी मैंने भी भजन गाये थोड़े ,।
8 अगस्त ,वीरवार ,9.20सुबह
अभी बस में बैठे हैं शानदार भजन कीर्तन चल रहा है पूरा माहौल माता की भक्ति के रंग में रंग है ।
मां नैना देवी के दर्शनों को जा रहे है ,नँगल से आनंदपुर साहब रोड पर आगे से मोड़ है नैना देवी की और जाने का।
इससे पहले सुबह आराम से 5.30उठा ,Ac में कम्बल लेकर सोना पड़ा।
नाश्ते में पूरी छोले और अचार।
सुरेखा ,को अश्वनी ने कहा हुआ है तो वो जरूरत का पूछती रहती है ।
भगत जी बढिया से बातें करते ओर बताते रह्ते है ।
उन्होंने अभी गुड़गांव में 1.82 करोड़ में फ्लैट लिया है ,उनकी बेटी पारुल ने भी ।
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शुक्रवार 9 अगस्त को
मां चिन्तपूर्णी दरबार की यात्रा ,शानदार रही ,
फिर दर्शन के बाद गंगानगर धर्मशाला में इस बार तो रेणु भाभी ने पहले चाय नाश्ता करवा दिया और फिर राजू भाई ने दुबारा से मनुहार कर बेसन बर्फी और मठरी ,बालूशाही ,खिलाई ।
अच्छे से मान करता है ,कह रहे थे के अब धरनशाल में निर्माण कार्य करवाना है तुम्हे भी 1 लाख का मेम्बर बनाना है ।मैंने हां कर दी ।
जय माँ चिन्तपूर्णी की ।
दोपहर 1 बजे ज्वाला जी रोड पर बस पार्क की फिर हमेशा की तरह ऊषा माता धर्मशाला अबोहर वालो की में बसेरा ।
कमरा न 38 सुरेखा ने हमे अलग दे दिया ।
गर्मी काफी है उमस भी ,शायद बारिश हो ।अभी सुबह 6.३7 बजे है ,भंडारे की चाय पी है अब शेव करने का है ,
कल शर्मा जी रेस्टोरेंट वाले भी मिले मन्दिर के रास्ते पर होटल है हर बार वहां सुबह नाश्ते में आलू के परांठे खाते है ।
रात को मिले थे उनसे बुजुर्ग बड़े खुश हुए आशीष देते रहे ,यही प्रेम की शक्ति है ।
ज्वाला माता के दर्शन 9 बजे से पहले हो गए ।
अस्तु
धर्मशाला में यहां पानी की कमी की वजह से काफी दिक्कत होती है हमेशा ,पर मैनेजर व्यवस्था ही नही करते ।
चलो थोड़ा बहुत तो adjust करना ही पड़ता है ।
अब नाश्ता करके कांगड़ा के लिए निकलना है।
10 अगस्त शनिवार-जारी
शाम को 6.30 बजे चामुंडा जी मे लुधियाना धर्मशाला जो 2मंजिला बीबी हुई है ,में पहले से बुक करवाया हाल 39 नम्बर मिल गया ,कु छ सवारियां , बल्कि एक ही परमजीत आंटी है जो बहुत अहंकारी स्वभाव की है ,हर जगह नाटक करती रहती है ,कुछ तो उसके साथ की 15 सवारियां है जिनकी वजह से वो हावी होना चाहती है ,अब ऐसे तीर्थ पर आकर भी अपने को न बदला तो क्या लाभ ऐसी यात्रा का ।
उससे पहले सुबह कांगड़ा बाई पास पर बस को खड़ा करके ऑटो लिया आने जाने का प्रति सवारी 50 रुपये में और मां ब्रजेश्वरी, जिसे नगरकोट कांगड़े वाली देवी भी कहते है,के दर्शन करके आये ।
पहली बार 25 साल में माँ बगलामुखी के दर्शन हुए
यह स्थान कांगड़ा जिले में बनखंडी गाँव मे स्थित है कांगड़ा से 25 किमी दूर यह मंदिर चारो तरफ हरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है ,काफी विशाल परिसर में जगह जगह हवन कुंड बने है जिनमे विभिन्न पुजारी भगतों को जवन करवा रहे है ।
अत्यंय शक्तिशाली यह पीठ सिद्ध तांत्रिक पीठ है ,जहां सब मनोकामनाएं विशेषकर शत्रु नाश ,कोर्ट कचहरी आदि और विवाह बाधा आदि दूर होती है ।धन्यवाद है सुरेखा देवी का यात्रा में यहां के दर्शन शामिल करने के लिए।
अब रविवार सुबह के
8.30 बज रहे है ,सब नह चुके हैं बस सबके तैयार होते ही चामुंडा जी माँ के दर्शन को जान है फिर धर्मशाला मैक्लोडगंज।
बारिश लगातार जारी है ।
जारी
सुबह चामुंडा माँ के दर्शन करने गए तो बारिश बूंदाबांदी हल रही थी ,हम छाता लेकर चले थे ,handa जी हमेशा की तरह भूल गए ,पर साथ आराम स तीनो ने एडजस्ट कर लिया ,मन्दिर निर्माण कार्य प्रगति पर है ,अभी मुख्य कक्ष पूरा बना नही है इसलिए दर्शन बाहर से ही कराए जा रहे थे ,हमने भी आराम से जाते ही मत्था टेका और फिर मन्दिर परिसरमे ही। चल रहे अनेक भंडारों मे से एक मे भटूरे और छोले का नाश्ता किया फिर अन्य लंगर में काफी पी।
12 बजे करीब धर्मशाला के लिये निकले ,और 1 घण्टे में बस स्टैंड के पास टेक्सी स्टेंड पर पहुंच गए ,जहां 1200 में 4 जन केलिए टेक्सी ली और भागसू नाग और मैक्लोडगंज घूमना तय पाया।
बढिया से हो गया , नामग्याल मोनेस्ट्री में पवित्र शांति का अहसास होता है ।
नामग्याल मठ, जिसे 14वें दलाई लामा के मठ के रूप में भी जाना जाता है, एक पवित्र स्थान है जहां विभिन्न बौद्ध प्रथाओं जैसे कालचक्र, वज्रकिलया, गुह्यसमाज, यमंतक और चक्रसंवर से जुड़े अनुष्ठान होते हैं। नामग्याल तांत्रिक कॉलेज के रूप में भी जाना जाता है, इसमें वर्तमान में 200 भिक्षु रहते हैं जो मठ की प्रथाओं, कौशल और परंपराओं की रक्षा करने की दिशा में काम करते हैं। यह तिब्बत के बाहर सबसे बड़ा तिब्बती मठ भी है।
बस ,शाम 4 बजे तक धर्मशाला बाईपास पर बस के पास आते आए मौसम पूरा खुल गया ओर धूप खिल आई ।
चामुंडा जी मे भी जब 6 बजे के करीब पहुंचे तो यह भी मौसम खुल और खिल चुका था शायद हम लोग के आने के आनन्द में ।
अभी 9.27 रात के हुए है नीचे ही चल रहे भंडारे में खाना खाया दाल और शाही पनीर चावल और रोटी बढिया खाना ,कमरे में आकर घर से लाया हरीराम हलवाई का कलाकंद आज खाकर खतम किया है ।
पेकिंग कगभग हो चुकी है ,कल सुबह 8 बजे तक कटरा के लिये निकलना है ।
यात्रा शानदार ,सुरेखा का इंतजाम और व्यवहार दोनों गज़ब ,कुछ अश्विनी ने कहा हुआ है उसका असर है कुछ मेरा ,भगत जी का विनोदी स्वभाव ,भगत जी का ज्ञान और
बिरसा राम जी का शांत ,सब से घुल मिल गए है ,औऱ लगता नही के पहली बार साथ आये है ।
बस कल कटरा पहुँच जाए और परसो माता रानी शक्ति देना 14 किमी की चढ़ाई की ।
12 अगस्त सोमवार
सुबह 9बजे के करीब चामुंडा जी से निकले ,पठानकोट से लखनपुर सम्पर्क सड़क पर एक गाँव के बाहर हनुमानजी की बहुत बड़ी मूर्ति के पास पानी का टैंक और बढिया पीपल के पेड़ के नीचे सामना उतर कर हलवाइयों द्वारा शानदार आलू सोयाबीन को सब्जी और तवे की चुपड़ी रोटी बना कर खिलाई गई ।
लेकिन लखनपुर में एक तो टेक्स करवाने के दौरान भी जम्मू पुलिस ने नाटक किये के ब में5 सवारी ज्यादा है उतारो और रोडवेज बस सेभेजो ,हमने भी रिश्वत नही दी और मैं और 4 अन्य जन उतर गए और ,हिमचल की बस से बैठे और कंडक्टर को बताया के भाई हमे जबर्दस्ती उतार दिया ,उसने कहा कोई बात और आधा किमी दूर लखनपुर मार्किट में उतर गए ,कोई पैसे भी नहीं लिए।
फिर तो जम्मू से कतराते तक पूरे रास्त्व भजन गाते आये मैंने भी खूब गये और दो भजन नैन खुद लिखे उसे गाया और सबने पसंद किया ।
रात 11 बजे कटरा धर।वीर धर्मशाला ,खाना बनाया हलवाइयों ने दाल रोटी ,और सो गये 12.3० बजे ।
13 अगस्त मंगलवार
सुबह 7.40 ठीक ताराकोटी मार्गसेही RFID कार्ड लेकर चढ़ाई शुरू की।
बहुत जोर आया ।
जय माता दी राह भर करते करते भवन पर 12 .30 बजे पहुंच गए ।
1 बजे पहले मैं अकेला दर्शन को गया ,बिरसा राम जी और हांडा जी पहले समान के पास बैठे नया दर्शन मार्ग sky walk में अकेले चलते हुए मा से मन की बात करता चला के एंजला को सही राह लगाओ और उसकी MDS के लिये धन की व्यवस्था कराओ।
फिर 3 बजे मैं अकेला घोड़े पर भैरो के दर्षन को गया और वही से सीधा घोड़े पर अर्द्ध कुवारी ,वहां भगत जी और बिरसा जी मिल घे7 और थोड़ा आगे सुरेखा ,राज और एक और आंटी मिल गए हर साथ ही बाटे करते आए।
बिरसा जी के पैर और कूल्हे में अत्यधिक दर्द होने लगा फिर भी जैसे तैसे हम साथ आ गए वापिस रात 9।बजे धर्मशाला
अभी बुधवार 13 अगस्त 2024 दोपहर के 2.35 बजे है ,सुरेखा भज यही बैठी है हमारे कमरे में ,21 नम्बर में ।
भगत जी बैठे है और बिरसा जी भी।
10 मिनट पहले भगत जी बाजार से पैक करवा कर 3 मीठी लस्सी मिट्टी के सकोरे में लाये ,बढिया स्वाद था।
बस अब वापसी की तैयारी है 4 बजे।
इस बार की यात्रा अलग रही और गज़ब रही ,
सुरेखा का छोटा बेटा साहिल हमारे कमरे में ही है आए उसका दोस्त हर्ष, दोनों शांत स्वभाव के है।
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