उसकी मोहबत शायरी

 उसकी मोहब्बत ....27 मई 25

मोहब्बत इश्क शायरी

जब सर चढ़ती है

मकाम अपना पा ही लेती है

नज़ाकतों से सम्भाल है

अपनी

मोहब्बत का हर  हिस्सा (किस्सा)

पर

वो न जाने क्यों

 हर बार

मुस्कुरा कर

 नजरें झुका ही लेती है ।।

*कभी कभी तो  वो 

मुझे यूं भी आजमाती है

मेरी धड़कनो को  बढ़ाती है ....2

अदा से नजरे उठाकर

शोखी  से आंख बन्द कर लेती है ।।

अब इश्क में इम्तहान भी होना है ...तो

अर्ज है ...

मेरे इश्क का इम्तहान  यूं भी लेती है

 ये रात की तन्हाई 

कभी नींद से बोझिल 

कभी गमो से आजिज 

उसकी यादों की परछाई 

जो सपनो में उतरे तो

दिलो में फैल जाए

मोहब्बत की रोशनाई

मोहब्बत की रोशनाई .....

उसकी सोहबत से  है 

दिल रोशन रोशन 

पर

उस बेवफा 

धोखा देने वाले दिल को मैं  भुलाऊ कैसे 

तड़प है मेरे सीने में, 

उसे दिल से लगाऊ कैसे ।।।

**

वो तो  हर पल मुझे सताती है,

उसकी जुस्तजू है  जो

हर पल मेरे दिल को तड़पाती है

बस  हर एक पल में, 

हर लम्हे में 

मैं उसे 

उन मोहब्बत की गहराईयों में, 

ढूंढता हूं 

सच कहू तो उसे नही बल्कि 

खुद को ही  ढूंढता हूँ ,

क्योके मोहब्बत 

तो नाम ही बेवफाई का है

फ़िर भी 

धोखा देने वाले दिल को मैं कैसे समझाऊं,

तड़प है  मेरे सीने में, 

उसे भुलाऊँ कैसे

उसे भुलाऊँ कैसे .......?

*******

#स्वाति नक्षत्र की बूंद सीप में गिरती है तो बून्द मोती बन जाती है#

उमंगे ----तमन्ना ----ख्वाहिशें---हसरते

इतनी उठी तुझसे मिलके 

इतनी उठी तुझसे मिलके

जैसे सीप मोती बन गया 

स्वाति की बूंद गिरके ---2

****

 ट

ज्यों गिरता तारा 


मुस्कुराते जख्म मेरी दिवानगी पे


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