संदेश

Gz meetup पर 2024

  कोई गंगा जी आता है #GZ जो कोई हरिद्वार आता है वो मन की पा ही जाता है... भगीरथी के तट पर उसका हर दुख  तर ही  जाता है..     ये माँ गंगा है जो सदियों से हमारे दिल पे छाई है -- जो सगर के पुत्रों को मुक्ति देने -शिव की जटाओं से भगीरथ जी  के तप से ही तो इस पुण्य धरा पे आई है ।। पतित पावनी मां गंगा कही मंदाकिनी, कहीं अल्कनन्दा तो कही जान्हवी कहलाई है जो युगों से  हमारे मन को पवित्र करती आई है ...    परन्तु हम ही है जो इसका उपकार विस्मृत करके भूले है तभी तो जगह जगह इसके तट पर भी  होटल रिसोर्ट खोले है ... ये लालच लोभ की अंतहीन  दौड़  में मानव  अंधा होता जाएगा फिर इस मानवता को कोई न बचा पायेगा हमारे  धर्म  पर तो भी खतरा ही मंडराएगा .. इधर हमारे GZ के बारे में दो शब्द -- घुमक्कड़ी की मशाल हमारे नीरज भाई जलाए है हर पहाड़ और पर्वत पर GZ का ध्वज फहराए है नमामि गंगे -चंडी घाट पर आज घुमकड़ो की फौज आई है जो हंसते गाते हए गुनगुनाये जा रही है           ...

बुद्ध पूर्णिमा -23.05.2024

बुद्ध पूर्णिमा - 23.05.2024 5 माला गुरू मंत्र गीता पाठ पांच देव मंत्र सत्य वचन ---//------------------ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण वल्लभे। ज्ञान वैराग्य सिध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥ माता च पार्वति देवी पिता देवो महेश्वरः। बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्॥ ------------------------------------

परछाईया 26 मार्च 2012

  26.03.2012 At PTC Saharanpur परछाइयो में बनती जानी अनजानी आकृतियां कभी हंसती कभी गाती कभी ह्रदय को गुदगुदाती है धीरे धीरे नाचते गाते दिल मे उतरती जाती है ह्रदय को भरमा कर परछाइयां फिर अगणित परछाइयों का जाल बुनती चली जाती है वाह ,रे मानव मन , समय चक्र में उलझ उन आकृतियों से रिश्ते बना , उन्ही में खो जाता है । मुस्कुरा कर जिंदगी जिये जाता है   .. पर भ्रम ...क्षणभंगुर पानी के बुलबुले सा अनायास ही टूटता है भोर के सपने सा -टूटा दिल भी तड़पता है । देख उन आकृतियों को बिछुड़ते --फिर व्याकुल हो रोता है , आकृतियां जो के मात्र परछाइयां है औ परछाइयां कब अपनी हुई है ...   वो तो मात्र प्रतिबिंब है मस्तिष्क की कल्पनातीत इच्छाओं-वासनाओ का जिन्हें मन पाने को आतुर --व्याकुल हो छटपटाता है और फिर से परछाइयों के खेल में उलझता चला जाता है उलझता  चला जाता है कभी न निकलने के लिए .   ।

दोस्ती

 दोस्ती प्रेम के  धागें से जुडा, एक़ विश्वास हैं दोस्ती। दुनियां के सभी रिश्तो मे, सब़से ख़ास हैं दोस्ती। दिलो क़ो दिलो से जोडने वाला, एक़ प्यारा एहसास हैं दोस्ती। दोस्त हमेशा साथ रहे ये जरूरी तो नही हर रोज उससे बात हो जाये ये जरूरी तो नही दोस्त तो हमेशा दिल मे रहते है रोज मुलाकात हो जाये ये जरूरी तो नही ।। बस त्याग समपर्ण बिना स्वार्थ के दोस्त दोस्ती निभाते है दुनिया कुछ भी कहे मस्त मगन गीत गाते जाते है ।।

यात्रा 22 जून24

 यात्रायें यात्रायें - अंतर्मन में स्व की खोज कुछ लोग यात्रा करने के लिए पैदा होते हैं और बस घूमने का आनंद लेते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वे खो गए हैं और बिना उद्देश्य के हैं। बल्कि वे तो है ही स्व की खोज में ,यात्राएं तो बहाना है ।दो तीन दिन से सोच रहा था के क्या लिखूं कहाँ से शुरु करू फिर कल मुक्ता जी ने समय सीमा भी दे दी , इसी पर अभी कुछ पंक्तियां दिल से निकली जो आपके साथ शेयर कर रहा हूं :- यात्राओं के पल है  हर किसी के अपने हिस्से , उनके कल के ,किसी के परसो औऱ किसी के  है बरसो पुराने  किस्से । मेरा भी ऐसा ही कुछ था सपना स्कूल  से आकर पड़ता मैं जब कमलेश्वर की कश्मीर यात्रा और रांगेय राघव की यायावरी और दुर्गम यात्राओं का वर्णन ... उतर आता आंखों के समक्ष सारा चित्रण।   मैं कब जाऊँगा कहाँ जाऊंगा बस यह सवाल हमेशा प्रश्नचिन्ह छोड़ जाता। वो था साल एक बचपन का जब मौका मिला पहली नीलकंठ की यात्रा का नानाजी के संग  , वो प्रदुषण रहित आसमान मस्त ठंडी बयारों के सग अपनी जीप की वो यात्रा आज भी याद आती है , और गरुड़ चट्टी के मीठी नीम के पकौड़ो ...

हरिद्वार 5 जुलाई 3024

 फिर से मां गङ्गा का बुलावा मम्मी डैडी तो मई से ही हरिद्वार आये हुए है ,फिर कुछ दिन पहले मुझे आदेश हुआ यहां आने का ,मम्मी ने कहा तुम आ जाओ हमे ले जाना और गुरुपूर्णिमा भी यही पूजन कर लेना । बस फिर क्या 2 जुलाई रविवार की AC 2 की रिजर्वेशन कराई औऱ पहुँच गया । आते ही स्वामी जी ने।बताया के रविवार शाम को हो संगीतमय सुन्दरकाण्ड का पाठ है अतः:सभी ने शामिल।होना है तो गुरु आज्ञा शिरोधार्य ,8 बजे से लेकर रात 10.30बजे तक आएं हुए सुन्दरकाण्ड भजन गायकों ने समां बांध दिया और सब मस्त होंगये , 3 जुलाई को सुबह 7 बजे का समय रुद्राभिषेक का ,जिसमे भोले कृपा से शामिल हुए साथ मे मम्मी भी ,फिर रविवार को ही विक्रम मामा मामी भी आ गए थे वो भी साथ ही बैठे । ततपश्चात तीनो गुरुओ के विग्रह का पूजन और नव वस्त्र अर्पण किये ,अति सुंदर और तेजोमय रूप गुरुजनों का ,नतमस्तक हो नमन किया । इसके बाद 10 बजे के करीब हवन का आयोजन उसमे मधुर मन्त्र ध्वनियों में  आहुतियां देकर देवताओं को प्रसन्न किया इन सब आयोजनों में पूज्य स्वामी कृष्णानंद जी ने सक्रिय रूप से भागीदारी की ,अदम्य ऊर्जा के प्रतीक है वे । उक्त कार्यक्रम स्वामी...

घुमक्कड़ी क्यो 26 जून 24

  घुमक्कड़ी की प्रेरणा सोचने बैठा और ढूंढने लगा कुछ जवाबो के प्रश्न ,सच मे उत्तर तो मिलते है क़दम कदम पर कई बार प्रश्न ही गुम हो जाते है  , आज फिर सोच में पड़ गया के अब उत्तर चाहिए के मैं घूमना क्यो चाहता हूँ या घूमने का बस खो जाने का मन क्यो करता है , तो मन में दिल मे ह्रदय में कुछ ख्याल आये , जैसा किसी कवि के मन मे ये  गीत आया 'तुमको देखा तो ये ख्याल आया जिंदगी धूप तुम घना साया ' हाँ मैं दुनिया के कोने-कोने में अपनी दास्तां में छिपी खूबसूरती को खोजने की तलाश में हूँ ओर पर्वतों की चोटियों से घूमते हुए, समुंदरों के किनारों पर खोजते हुए सूरज की पहली किरणों में दिखने वाली खूबसूरती  को देखते ही हैरान होता हूँ। अनजान बोली, अनजान चेहरे, फिर भी एक संबंध बनाने का जज्बा हमेशा रहता है। हम कही भी जाए  चाहे बंगाल या सिक्किम या फिर धरती के स्वर्ग कश्मीर भाषा की सीमाएँ दिल से गुज़रती हैं, यात्री की भावनाओं को समझाती हैं। मैं भी सड़कों की धूल में लिपटे सपनों को जीता हूँ। और प्रेम अमृत पीता हूं फिर हमारा  यात्राओं से विश्वास बढ़ता है स्वयं पर और ...