संदेश

Gz meetup पर 2024

  कोई गंगा जी आता है #GZ जो कोई हरिद्वार आता है वो मन की पा ही जाता है... भगीरथी के तट पर उसका हर दुख  तर ही  जाता है..     ये माँ गंगा है जो सदियों से हमारे दिल पे छाई है -- जो सगर के पुत्रों को मुक्ति देने -शिव की जटाओं से भगीरथ जी  के तप से ही तो इस पुण्य धरा पे आई है ।। पतित पावनी मां गंगा कही मंदाकिनी, कहीं अल्कनन्दा तो कही जान्हवी कहलाई है जो युगों से  हमारे मन को पवित्र करती आई है ...    परन्तु हम ही है जो इसका उपकार विस्मृत करके भूले है तभी तो जगह जगह इसके तट पर भी  होटल रिसोर्ट खोले है ... ये लालच लोभ की अंतहीन  दौड़  में मानव  अंधा होता जाएगा फिर इस मानवता को कोई न बचा पायेगा हमारे  धर्म  पर तो भी खतरा ही मंडराएगा .. इधर हमारे GZ के बारे में दो शब्द -- घुमक्कड़ी की मशाल हमारे नीरज भाई जलाए है हर पहाड़ और पर्वत पर GZ का ध्वज फहराए है नमामि गंगे -चंडी घाट पर आज घुमकड़ो की फौज आई है जो हंसते गाते हए गुनगुनाये जा रही है           ...

बुद्ध पूर्णिमा -23.05.2024

बुद्ध पूर्णिमा - 23.05.2024 5 माला गुरू मंत्र गीता पाठ पांच देव मंत्र सत्य वचन ---//------------------ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण वल्लभे। ज्ञान वैराग्य सिध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥ माता च पार्वति देवी पिता देवो महेश्वरः। बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्॥ ------------------------------------

परछाईया 26 मार्च 2012

  26.03.2012 At PTC Saharanpur परछाइयो में बनती जानी अनजानी आकृतियां कभी हंसती कभी गाती कभी ह्रदय को गुदगुदाती है धीरे धीरे नाचते गाते दिल मे उतरती जाती है ह्रदय को भरमा कर परछाइयां फिर अगणित परछाइयों का जाल बुनती चली जाती है वाह ,रे मानव मन , समय चक्र में उलझ उन आकृतियों से रिश्ते बना , उन्ही में खो जाता है । मुस्कुरा कर जिंदगी जिये जाता है   .. पर भ्रम ...क्षणभंगुर पानी के बुलबुले सा अनायास ही टूटता है भोर के सपने सा -टूटा दिल भी तड़पता है । देख उन आकृतियों को बिछुड़ते --फिर व्याकुल हो रोता है , आकृतियां जो के मात्र परछाइयां है औ परछाइयां कब अपनी हुई है ...   वो तो मात्र प्रतिबिंब है मस्तिष्क की कल्पनातीत इच्छाओं-वासनाओ का जिन्हें मन पाने को आतुर --व्याकुल हो छटपटाता है और फिर से परछाइयों के खेल में उलझता चला जाता है उलझता  चला जाता है कभी न निकलने के लिए .   ।

दोस्ती

 दोस्ती प्रेम के  धागें से जुडा, एक़ विश्वास हैं दोस्ती। दुनियां के सभी रिश्तो मे, सब़से ख़ास हैं दोस्ती। दिलो क़ो दिलो से जोडने वाला, एक़ प्यारा एहसास हैं दोस्ती। दोस्त हमेशा साथ रहे ये जरूरी तो नही हर रोज उससे बात हो जाये ये जरूरी तो नही दोस्त तो हमेशा दिल मे रहते है रोज मुलाकात हो जाये ये जरूरी तो नही ।। बस त्याग समपर्ण बिना स्वार्थ के दोस्त दोस्ती निभाते है दुनिया कुछ भी कहे मस्त मगन गीत गाते जाते है ।।

यात्रा 22 जून24

 यात्रायें यात्रायें - अंतर्मन में स्व की खोज कुछ लोग यात्रा करने के लिए पैदा होते हैं और बस घूमने का आनंद लेते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वे खो गए हैं और बिना उद्देश्य के हैं। बल्कि वे तो है ही स्व की खोज में ,यात्राएं तो बहाना है ।दो तीन दिन से सोच रहा था के क्या लिखूं कहाँ से शुरु करू फिर कल मुक्ता जी ने समय सीमा भी दे दी , इसी पर अभी कुछ पंक्तियां दिल से निकली जो आपके साथ शेयर कर रहा हूं :- यात्राओं के पल है  हर किसी के अपने हिस्से , उनके कल के ,किसी के परसो औऱ किसी के  है बरसो पुराने  किस्से । मेरा भी ऐसा ही कुछ था सपना स्कूल  से आकर पड़ता मैं जब कमलेश्वर की कश्मीर यात्रा और रांगेय राघव की यायावरी और दुर्गम यात्राओं का वर्णन ... उतर आता आंखों के समक्ष सारा चित्रण।   मैं कब जाऊँगा कहाँ जाऊंगा बस यह सवाल हमेशा प्रश्नचिन्ह छोड़ जाता। वो था साल एक बचपन का जब मौका मिला पहली नीलकंठ की यात्रा का नानाजी के संग  , वो प्रदुषण रहित आसमान मस्त ठंडी बयारों के सग अपनी जीप की वो यात्रा आज भी याद आती है , और गरुड़ चट्टी के मीठी नीम के पकौड़ो ...

हरिद्वार 5 जुलाई 3024

 फिर से मां गङ्गा का बुलावा मम्मी डैडी तो मई से ही हरिद्वार आये हुए है ,फिर कुछ दिन पहले मुझे आदेश हुआ यहां आने का ,मम्मी ने कहा तुम आ जाओ हमे ले जाना और गुरुपूर्णिमा भी यही पूजन कर लेना । बस फिर क्या 2 जुलाई रविवार की AC 2 की रिजर्वेशन कराई औऱ पहुँच गया । आते ही स्वामी जी ने।बताया के रविवार शाम को हो संगीतमय सुन्दरकाण्ड का पाठ है अतः:सभी ने शामिल।होना है तो गुरु आज्ञा शिरोधार्य ,8 बजे से लेकर रात 10.30बजे तक आएं हुए सुन्दरकाण्ड भजन गायकों ने समां बांध दिया और सब मस्त होंगये , 3 जुलाई को सुबह 7 बजे का समय रुद्राभिषेक का ,जिसमे भोले कृपा से शामिल हुए साथ मे मम्मी भी ,फिर रविवार को ही विक्रम मामा मामी भी आ गए थे वो भी साथ ही बैठे । ततपश्चात तीनो गुरुओ के विग्रह का पूजन और नव वस्त्र अर्पण किये ,अति सुंदर और तेजोमय रूप गुरुजनों का ,नतमस्तक हो नमन किया । इसके बाद 10 बजे के करीब हवन का आयोजन उसमे मधुर मन्त्र ध्वनियों में  आहुतियां देकर देवताओं को प्रसन्न किया इन सब आयोजनों में पूज्य स्वामी कृष्णानंद जी ने सक्रिय रूप से भागीदारी की ,अदम्य ऊर्जा के प्रतीक है वे । उक्त कार्यक्रम स्वामी...

घुमक्कड़ी क्यो 26 जून 24

  घुमक्कड़ी की प्रेरणा सोचने बैठा और ढूंढने लगा कुछ जवाबो के प्रश्न ,सच मे उत्तर तो मिलते है क़दम कदम पर कई बार प्रश्न ही गुम हो जाते है  , आज फिर सोच में पड़ गया के अब उत्तर चाहिए के मैं घूमना क्यो चाहता हूँ या घूमने का बस खो जाने का मन क्यो करता है , तो मन में दिल मे ह्रदय में कुछ ख्याल आये , जैसा किसी कवि के मन मे ये  गीत आया 'तुमको देखा तो ये ख्याल आया जिंदगी धूप तुम घना साया ' हाँ मैं दुनिया के कोने-कोने में अपनी दास्तां में छिपी खूबसूरती को खोजने की तलाश में हूँ ओर पर्वतों की चोटियों से घूमते हुए, समुंदरों के किनारों पर खोजते हुए सूरज की पहली किरणों में दिखने वाली खूबसूरती  को देखते ही हैरान होता हूँ। अनजान बोली, अनजान चेहरे, फिर भी एक संबंध बनाने का जज्बा हमेशा रहता है। हम कही भी जाए  चाहे बंगाल या सिक्किम या फिर धरती के स्वर्ग कश्मीर भाषा की सीमाएँ दिल से गुज़रती हैं, यात्री की भावनाओं को समझाती हैं। मैं भी सड़कों की धूल में लिपटे सपनों को जीता हूँ। और प्रेम अमृत पीता हूं फिर हमारा  यात्राओं से विश्वास बढ़ता है स्वयं पर और ...

कविता 28 जून 24

  ब्लॉग 1 कविता लहरों के गीत और जीवन संगीत     समुद्र की गहराई से उठी लहरें,    भूलाएं गमों के दर्द, दुख के फेरे।     बादलों की घनी चादर ऊपर बरसी     हर तरफ बस मुस्काने।     आओ ढूंढ़ ले इन लहरों में      अपने सपने सुहाने .....। जीवन तो है एक रहस्य और अनमोल हैं ये पल , इन लहरों के साथ ही गूंजते है जीवन संगीत के तराने ।             घने  बादलों में  छुपा है              एक रहस्य अनजान,              इस गर्जन में बिजली की  चमक              देती है सन्देश एक अनजान ।।              स्वर्गिक है ये  नजारा              ...

यात्रा 2024 जय माता की

 #यात्रा जारी रहेगी .....अनवरत ...लगातार... 12 अगस्त 2024 को कटरा बस पहुँच गई ,उससे पहले जम्मू कश्मीर सीमा ,लखनपुर चेक पोस्ट पहुंचते ही हमारे सभी प्री पेड़ मोबाइल सिम बन्द हो गई । 13 अगस्त को सुबह 8 बजे करीब कटरा से तारा कोटि मार्ग -हिमकोटी मार्ग से 9 किमी लम्बी चढ़ाई हमने 6.30 घण्टो में पूरी की । बहुत ही सिद्ध तीर्थ है माँ का दर -- चलने की शक्ति हर  छोटे बड़े महिला पुरुष वृद्ध जवान सबको अपने आप पॉजिटिव एनर्जी मिलती है और बन्दा बिना रुके चले जाता है और मां के भवन के करीब आकर थकावट दूर हों जाती है और दर्शन करके पिंडी रूप के कृत कृत हो जाता है । उसके न

14 अगस्त 24 ,माता यात्रा विवरण

 यात्रा --6 अगस्त से 15 अगस्त 24 त कल रात गंगानगर से निकले ,इस बार सुरेश धींगड़ा जी की बस केंसिल ,सवारी नही मिली उन्हें पर्याप्त,पर मेरा भी मन था औऱ बिरसा राम जी का भी ,फिर राजीव भाई भी तैयार था ,औऱ उसने कहा के चलेगे जरूर। फिर अश्वनी बंसल ने बताया के उनकी एक जानकर महिला है सुरेखा ,ssb रोड से ,माता रानी का नाम ले उनके साथ बुक करा दी सीट। और अभी तक बढिया रहा ,सीट हालांकि वो कह रही थी के आगे देंगी पर आश्चर्य10 बजे खिंची चौक पर जब बस RJ19 PA 4197 ,आई और सुरेखा ने हमे हमारी फेवरेट बिल्कुल आगे वाली ड्राइवर के पीछे3 वाली ही अलॉट कर दी ।जय माता दी । अभी नँगल में लक्ष्मी नारायण मंदिर धर्मशाला में ठहरे है ,कल नैना देवी जाना है। मुकेश मैनेजर ने इतनी मिन्नते करवाई और आखिरकार ac कमरा दे दिया । अभी उसी में है । सुबह 6 बजे पटियाला में काली माता मंदिर दर्शन करके ,मनसा देवी मंदिर ,पंचकूला ,चंडीगढ में दर्शन किये । आनंद आया भीड़ नही मिली अभी तक । बस में भी मैंने भी भजन गाये थोड़े ,। 8 अगस्त ,वीरवार ,9.20सुबह अभी बस में बैठे हैं शानदार भजन कीर्तन चल रहा है पूरा माहौल माता की भक्ति के रंग में रंग है । मां...

जो कोई हरिद्वार आता है

 जो कोई हरिद्वार आता है वो मन की पा ही जाता है हमारे आश्रम में आके वो गुरु किरपा पा ही जाता है ये पावन धरा है कनखल की  जहां पर दक्ष विराजे है जहां पर सती कुंड में सत्य का डंका बाजे है।। (इसी कनखल में   परम् पूज्य गुरुदेव परमहंस स्वामी श्री विष्णु देवानन्द गिरिजी महाराज ने ज्ञान की गंगा बहाई थी) --- ये पावन धरा है कनखल की  जहां पर दक्ष विराजे है जहां पर सती कुंड में सत्य का डंका बाजे है।। इसी कनखल में गुरुजी ने ज्ञान की ज्योत जलाई थी उसी ज्योति से प्रकाशित  पूज्य गुरुदेव विराजे है ( उनके राम और कृष्ण सदृश्य शिष्य परम् आदरणीय ,परम् श्रधेय, अर्चनीय वंदनीय महत स्वामी श्री रामानन्द गिरी जी और स्वामी कृष्ण नंद गिरी जी) इसी कनखल में गुरुजी ने ज्ञान की ज्योत जलाई थी उसी ज्योति से प्रकाशित  पूज्य गुरुदेव विराजे है हमारे गुरूद्वय ने ऐसी तप की अलख जगाई है जो दूर दूर से इतने पूज्य सन्तो को ले आई है       --हम भी दर्शन के इनके भक्ति में खो गए है          इनकी उपस्थिति से ही धन्य हो गए है ये शिव भोले की कृपा है और मां गंगा का ...

सनातन कविता

 सनातन कविता यदि शेर अहिंसा वादी हो तो गीदड़ शोर्य दिखाते हैं , यदि गरूड़ सन्यासी हो जाए  तब सर्प पनपते जाते हैं , इस अहिंसा के मकड़जाल में  सनातन विनाश आरंभ हुआ  जब अशोक महान ने शस्त्र तजे  भारत विघटन प्रारंभ हुआ।।  जय श्री राम  वन्दे मातरम  भारत माता की जय

चलते चलते --श्याम गीत 11 जन25

 श्याम गीत 11 जनवरी25 चलते चलते  बाबा के दर पे आ जाएंगे सारे जय श्री श्याम गाएंगे  सब जय श्री श्याम गाएंगे .... चलते-चलते बाबा के दर पे आ जाएंगे  सारे जय श्री श्याम गाएंगे  सब  जय श्री श्याम जाएंगे + हंसते  गाते - सब मिल के आके....  निशान चढ़ाके जाएंगे ---/सब जय श्री श्याम गॉएंगे  तब जय श्री श्याम गाएंगे ....l #रास्ते में रुकना नहीं रास्ते में थकना नहीं₹ बाबा है सन्ग अपने फिर डर काहेका है  हारे के सहारेsss .....हम मिलकर यह गॉएंगे...  सारे जय श्री श्याम गाएंगे तब जय श्री श्याम गाएंग  चलते चलते ... चलते चलते बाबा के दर पे आ जाएंगे सारे जय श्री श्याम गाएंगे -2 हंसते गाते यूं ही  चलते-रिंग्स से खाटू आ जाएगें --सारे जय श्री श्याम गाएंगे-2 बैठा है खाटू में फूलों से खूब  सजाया है बाबा है अपना सा सुंदर  रूप बनाया है-2 बाबासे हम मिलकर हम दिल की बात सुनाएंगे--2 सारे जय श्री श्याम गायेंगे -2       चले  है रिंग्स से       हाथों में निशान लेके -       थकने का काम नही बाबा को स...

कविता बीकाणा पर 29-04-25

 बीकाणा - 29 अप्रेल 2025 बीकानेर की धरती पर अभी हम आके बैठे हैं इस माटी की खुशबू को हम अपना ही बैठे हैं यह धरती है शहीदों की  जहां कुर्बानियां हुई हुई है  इस धरती के समक्ष आकर शीश झुका ही बैठे हैं .... बड़े-बड़े मूर्धन्य लेखक ,कवि ,  साहित्यकार हास्य  रस , वीर रस के कवि और अद्भुत श्रोता में यहां पर विराजमान है तो मेरे दिल के भाव आपको कहना चाहूंगा //जहां  जूनागढ़ से तोपों की आवाज गूंजती थी अब मां करणी के मंदिर की झंकार गूंजती है अब बम बम भोले के जयकारे हर  और छाए हैं  इन मधुर तानो  में हम सब मुस्कुराये है ...  और अंत मे क्या तेरा है ---क्या मेरा है --- यहां सब खो ही जाना है क्या साथ लेके आये थे -जो अब लेके जाना है ये दुनिया है स्वार्थ  की  इसे तो अपने मन की है फिर काहे का घबराना है   कौन किसी के साथ है कौन है बरख़िलाफ़ अब आईने से  भी हमने तो सच उगलवाना है !! पर बेचारा आईना ... चेहरे .....कितने ? आईना तो घबरा उठा क्या दिखाऊ क्या छुपाऊँ इंसान की फितरत के कितने उघड़े चेहरे है , लेकिन आशा ....  है पर दिन वह दूर नही है जब...

नजर का जादू 29 अप्रेल 25

 नजर --- 29 अप्रेल 25 नजर झुकी नजर उठी।नजर मिली नजर मिली नजर लड़ी दिल कि राह पकड़ दिल में उतरी गहरी उतरी फिर डूबी उतरी नापी गहराई -*-किसकी दिल की ) फिर दम तोड़ गई  जज्बात छोड़ गई नजर झुकते उठते गिरते दिल  मे डूबते उतराते आंसुओ के रास्ते बह निकली नजर फिर  नजर नजर न रही आह हो गई धड़कनो की कराह हो गई

शायरी 5 अप्रेल 25

 शायरी गीत ग़ज़ल 5 अप्रेल 25 वह कहते हैं कि आओ जख्मों पर मरहम लगा दे  दर्द देते हैं मगर -- तड़पने भी नहीं देते एक तीर दिल में गढ़ गया नश्तर  बनकर  आहें  देते हैं मगर रोने भी नहीं देते । ध्यान चाहूंगा -- आह निकले और वाह निकले- वो सर्द  शामों में उनका मेरे शाने  से लगना   तन्हा रातों में उनका (वो)चुपके से मिलना ख्वाब देते हैं मगर जगने  भी नहीं देते -2 वक्त रुखसत मेरी आंखें नम थी  वो खामोश वादियाँ  भी गुमसुम थी  अब  वीरानियों में कौन आएगा  गीत वफाओं के कौन गाएगा वे कहते हैं कि तुम  कल फिर आना  अभी जख्मों का बाकी है कुछ हिसाब पुराना इज़ तरह  जमाने से वफा का नाम गुम जाएगा  फिर कोई ना श्री फरहाद के किस्से गाएगा । तुम तो खुश रहो अपनी जन्नत में  खूब गाओ गीत तरन्नुम में  हम तो बैठ के आसमान तकते  कि उसका चेहरा एक बार नजर आए  जिंदगी का कोई सहारा बन जाए वरना तो अब जिस्म ही बाकी है जान तो चली गई फिर भी आस बाकी है  5न

उसकी मोहबत शायरी

 उसकी मोहब्बत ....27 मई 25 मोहब्बत इश्क शायरी जब सर चढ़ती है मकाम अपना पा ही लेती है नज़ाकतों से सम्भाल है अपनी मोहब्बत का हर  हिस्सा (किस्सा) पर वो न जाने क्यों  हर बार मुस्कुरा कर  नजरें झुका ही लेती है ।। *कभी कभी तो  वो  मुझे यूं भी आजमाती है मेरी धड़कनो को  बढ़ाती है ....2 अदा से नजरे उठाकर शोखी  से आंख बन्द कर लेती है ।। अब इश्क में इम्तहान भी होना है ...तो अर्ज है ... मेरे इश्क का इम्तहान  यूं भी लेती है  ये रात की तन्हाई  कभी नींद से बोझिल  कभी गमो से आजिज  उसकी यादों की परछाई  जो सपनो में उतरे तो दिलो में फैल जाए मोहब्बत की रोशनाई मोहब्बत की रोशनाई ..... उसकी सोहबत से  है  दिल रोशन रोशन  पर उस बेवफा  धोखा देने वाले दिल को मैं  भुलाऊ कैसे  तड़प है मेरे सीने में,  उसे दिल से लगाऊ कैसे ।।। ** वो तो  हर पल मुझे सताती है, उसकी जुस्तजू है  जो हर पल मेरे दिल को तड़पाती है बस  हर एक पल में,  हर लम्हे में  मैं उसे  उन मोहब्बत की गहराईयों में,  ढूंढता हूं...

बाबा श्याम के दीवाने गीत

  बाबा श्याम के दीवाने यह शाम मस्तानी पर 310525 हरिद्वार की ओर बाबा (हम)  श्याम के दीवाने श्याम श्याम रटे जाये हमें डोर कोई खींचे खाटू की ओर लिए जाए -2 **वह बैठा है खाटू में   फूलों से सजाया है मन को मोह ले जो ऐसा सुंदर रूप बनाया है -2 ऐसा लगे जैसे की वो हमारे संग में चल रहा हो .....2 बाबा श्याम के दीवाने...... 2* हारे का सहारा है वह तीन बाण का धारी है हारे का सहारा है वह तीन बाण का धारी है भीम की शक्ति है वह श्री कृष्ण का अवतारी है भीम की शक्ति है वह श्री कृष्ण का अवतारी है --///आये हैं तेरे दर पर (पे) बाबा हम पे  कृपा एक बार कर दो ...... बाबा श्याम  (हम)  श्याम के दीवाने श्याम श्याम रटे जाये हमें डोर कोई खींचे खाटू की ओर लिए जाए -2 3^^

सफर जिंदगी का कविता 2

  सफर जिंदगी का - 2 सरपट चलती जिंदगी मानो हो छुक छुक ट्रेन का सफर , चलते पेड़ उड़ते बादल बहकती हवाये मचलती घटाए बदलते चेहरे - भटकते  लोग - सफर लाजवाब , न जाने किस और ले जाये सफर अंतहीन -और चलायमान  करिश्मे कुदरत के बिखरे है बेहिसाब।।    कही कोई पक्षी चहका कही कोई कोयल कुहकी झकृत कर ह्रदय के तारो को ये किसकी पायल खनकी कवि की कल्पना है या शब्दो की उड़ान कुछ तो है जो मन बगिया फूलों की खुशबू से महकी ।। ओ साथी चल लेके मुझे भी झील के उस पार जहां धरा आकाश मिलते है ज्यो मिलते है बिछुड़े प्रेमी दो... फिर निकल जाएं यात्रा पर शुरू कर एक नया सफर जिंदगी का छोड़ संग स्वार्थी सम्बंधो का बस एक हो निकल चले सुदूर पर्वतों के पार दूर गगन की पुकार ये पुकार जब घनीभूत होगी तब ही निकलेगी ह्रदय से तरंग बजेगा अनहद  नाद जो एकाकार हो - ट्रेन के संग लेके जायेगा मंजिल की और वहीं तो सफर की मंजिल है निर्विकार निर्विचार हो हो जायेगे जब उस ॐ से एकाकार हो जाएंगे जब उस ॐ से एकाकार तभी पूर्ण होगा ये जिंदगी का सफर ये जिंदगी का सफर (ट्रेन जोधपुर की ...

सताओ न हमे लोगो भेंट 3

 माता गीत try सताओ ना हमें लोगों (मत रोको मुझे लोगो)  हमें दिल की बीमारी है(मुझे भवनों पे जाने दो) हमारा मर्ज तो मैया के दर्शन की खुमारी है दिल किस से पहाड़ो वाली माता शेरो वाली माता से दिल  नब्ज  जो देखी वैध  ने बीमार लिख दिया बीमारी का नाम उसने मैया जी का प्यार लिख दिया मैं कुर्बान क्यों ना जाऊं  उस अपने  हकीम पर  मैं कुर्बान क्यों ना जाऊं  अपने हकीम पर  जिसने दवा का नाम  मैया जी तेरा दीदार लिख दिया सताओ न हमे लोगो  हमे भवनों को जाने दो  भवन में जाकर के मैया का दीदार पाने दो       जब होंगे खुले दर्शन तो मन की मुरादे पा जाएंगे और नाचते गाते अगले बरस फिर से तेरे दर्शन को आएंगे सताओ न हमें लोगो हमें दिल की बीमारी है  हमारा मर्ज तो  मैया के दर्शन की खुमारी है हमें चढ़